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बदनावर के इतिहास में पहली बार शास्त्रीय संगीत सभा का अभूतपूर्व आयोजन

बदनावर शहर के इतिहास में पहली बार शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम हुआ. इसमें इंदौर से संगीतविज्ञ श्री गौतम काले ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी. यह अनुभव सभी के लिये रोमांचक रहा.

कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए श्री आनंद जैन ने बताया कि यह कार्यक्रम विद्यालय के छात्रों के लिये संगीत के उपनयन संस्कार की तरह है. शास्त्रीय संगीत को सुनने और समझने के लिये एक खास तरह के एप्रिसिएशन की जरूरत पड़ती है, जिसके लिये विद्यालय अपने छात्रों को तैयार कर रहा है. यह कार्यक्रम बच्चों के लिये इसी संस्कार की एक शुरूआत है.

श्री गौतम काले ने अपना कार्यक्रम शुरू करते हुए कहा कि संगीत भगवान से हमें मिला है यहा ब्रह्मा जी से होते हुए कई देवताओं के जरिये हम तक पहुंचा. यह एक दैवीय परंपरा है जिसका हम केवल पालन कर सकते हैं. उसमें कोई फेरबदल मुमकिन नहीं है. बारह सुरों में पूरी दुनिया का संगीत गुंथा हुआ है और आज तक कोई भी तेरहवां स्वर नहीं बना पाया है. उन्होंने समय और स्थान को ध्यान में रखते हुए राग अहीर भैरव से अपने कार्यक्रम की शुरूआत की. इसके पश्चात् उन्होंने गांधीजी के पसंदीदा भजन वैष्णव जन गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया. उन्होंने बच्चों के साथ संगीत की बारीकियां भी डिस्कस कीं और उनसे पूछा कि वे क्या सुनना चाहेंगे. बच्चों के साथ मिलकर उन्होंने रघुपति राघव राजाराम की प्रस्तुति के साथ अपने कार्यक्रम को समाप्त किया. श्री गौतम काले के साथ तबले पर श्री युवा संगतकारों की एक टीम थी जिन्होंने ने वाद्यों और सुरों के साथ श्री गौतम काले को बंदिशों में सहयोग दिया.

अतिथियों की सराहना

अपने सारगर्भित संबोधन में श्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने छात्रों से चरित्र निर्माण पर कार्य करने के लिये कहा. उन्होंने रविंद्रनाथ टैगोर और रॉबर्ट फ्रॉस्ट को उद्धत करते हुए कहा कि अपने वायदों को पूरा करने के लिये विश्राम का अवसर नहीं मिलता, आपको लगातार मीलों चलना होता है और अपने स्वजनों से किये वायदों को पूरा करना होता है. उन्होंने कहा कि संगीत का यह अनुभव अभिभूत कर देने वाला हैा आज के छात्रों का यह भाग्य है कि उन्हें विद्यालय में आईपैड्स के जरिये पढ़ाई करने को मिल रहा है. हम जिस समय में पढ़े थे तब ये सुविधायें उपलब्ध नहीं थीं.

उन्होंने छात्रों से कहा कि रीडिंग एक जरूरी स्किल है जिससे आप अपनी इमेजिनेशन को कई गुना बढ़ा सकते हैं. इसलिये छात्रों को लायब्रेरी का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिये.

श्री मनोज सोमानी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि संघर्ष से ही सफलता हासिल की जा सकती है, और सफलता प्राप्त करने के लिये व्यक्ति को अपनी क्षमता से अधिक मेहनत करने के लिये तैयार रहना चाहिये. उन्होंने कहा कि छात्रों को देशी खेलों जैसे कबड्डी पर ध्यान देना चाहिये क्योंकि ये हमारी मिट्टी से जुड़े हुए खेल हैं. उन्होंने छात्रों से स्वच्छता से जीवन जीने की भी अपील की.

श्रमण हाई के पिछले दो वर्ष के कार्यों के बारे में बताते हुए श्री आनंद जैन ने बताया कि श्रमण हाई के छात्रों ने पिछले दो वर्षों में खेलों में कई सफलताएं अर्जित की हैं. छात्रों ने शतरंज में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में जीतते हुए नेशनल में प्रवेश किया है. इसके अतिरिक्त हैंडबॉल में डिवीजनल लेवल पर जीतते हुए खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में पहुंचे हैं. कैरम, कबड्डी, टेबल टेनिस और खो खो में भी विद्यालय के छात्रों ने उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की हैं.

श्री जैन ने कहा कि हमारे छात्र अगली पीढ़ी के रोजगारों को अपनाने के लिये तैयार हो रहे हैं. इसी कड़ी में श्रमण हाई प्रदेश में पहला और देश के गिने चुने स्कूलों होगा जहां आई पैड्स के जरिये कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग कक्षा ४ से सिखाई जायेगी.

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